Ananda Marga Dallas invites you to celebrate Ananda Purnima

Namaska’r All Brothers & Sisters,

On the auspicious occasion of A’nanda Pu’rn’ima (Birthday of Beloved BA’BA’, Shrii Shrii A’nandamu’rtijii), May 06, 2012 (Sunday), it was decided during last Sunday’s Dharmacakra by all present to observe the occasion as follows:

04:45am : All gather at our Jagrti (2355 Trellis Place, Richardson)
05:00am : Paincajanya (Prabha’t Sam’giita, Kiirtan, Meditation), followed by reading of A’nanda Va’nii at exact time of BA’BA’s Birth, & Stories and personal
experiences of devotees
09:00am : 3-hour Akhan’d'a Kiirtan
12:00pm : Dharmacakra
01:00pm : Collective Meal

05:30pm : Dharmacakra & Celebration, Collective Meal (also for those who could not attend morning program).

(*** If anyone would like to organize more programs like praca’r and seva on the same day, please contact the local A’ca’ryas.)

In His Service,
A’c. Advaya’nanda Avt.
A’c. Shubhacetana’nanda Avt.

Posted in Ananda Marga Events | Leave a comment

Hindustan publishes news in Hindi

आध्यात्मिक प्रगति के आठ अनिवार्य तत्व
First Published:30-04-12 09:06 PM

आध्यात्मिक प्रगति के अनिवार्य तत्वों के विषय में भगवान बुद्ध ने कहा कि ये नियम आठ हैं। तुम लोगों को इन बिन्दुओं को स्मरण रखना चाहिए। पहला है सम्यक् दर्शन। दर्शन क्या है? सामान्य संस्कृत में दर्शन माने देखना; और दार्शनिक भाषा में अथवा आध्यात्मिक और मानसिक क्षेत्र में दर्शन माने किसी वस्तु को ज्ञानी की दृष्टि से देखना, एक साधक की दृष्टि से देखना है। दर्शन का अर्थ है जीवन का निर्देशन शास्त्र।
एक मनुष्य चल रहा है, किन्तु उसके चलने का यदि कोई लक्ष्य नहीं है तो उसके सारे प्रयास, उसका सारा श्रम व्यर्थ हो जायेगा। एक व्यक्ति बहुत कुछ कर सकता है, किन्तु उसकी सारी उपलब्धि बेकार हो जायेगी, यदि उसे अपने लक्ष्य की जानकारी न हो, उसे अपने गन्तव्य का पता न हो, इसलिए प्रत्येक मनुष्य का उसका अपना जीवन दर्शन होना चाहिए। इसके बिना प्रगति असम्भव है।
तुम लोगों को स्मरण रखना चाहिए कि यह प्रथम महत्वपूर्ण तत्व है। दूसरा आवश्यक तत्व है सम्यक् संकल्प। यहां सम्यक् संकल्प का अर्थ है दृढ़ आत्मविश्वास। ‘‘मैं इस कार्य को करूंगा’’, ‘‘मुझे निश्चय ही इस कार्य को करना है’’, इस तरह का दृढ़ आत्मविश्वास ही मानव जीवन में सफलता का रहस्य है। भगवान बुद्ध ने इसे दूसरा महत्वपूर्ण तत्व कहा। यह दूसरा आवश्यक तत्व है, जिसे प्रत्येक साधक को अपने जीवन में उतारना ही होगा। तीसरा तत्व है सम्यक् वाक्। एक व्यक्ति जब जीवन के किसी भी क्षेत्र में अपने को व्यक्त करता है तो उसे अपने ऊपर सम्यक् नियन्त्रण रखना चाहिए। इसी को कहते हैं सम्यक् वाक्।

चतुर्थ निर्देश है ‘सम्यक् आजीव’। एक अच्छे व्यक्ति को बहुत साफ-सुथरी और पवित्र आजीविका अर्जित करनी चाहिए। उसे निकृष्ट और अनैतिक तरीके से अपनी आजीविका अर्जित नहीं करनी चाहिए। यह चतुर्थ तत्व हुआ। अब पंचम है सम्यक् व्यायाम। तुम लोग जानते हो, बहुत से लड़के अपने शरीर को मजबूत बनाने के लिए अनेक तरह के शारीरिक व्यायाम करते हैं। यह शारीरिक व्यायाम हैं, किन्तु मानव अस्तित्व सिर्फ शारीरिक नहीं है। मानव अस्तित्व शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक, तीनों है। शारीरिक व्यायाम भी अच्छा है, किन्तु तुम्हें मानसिक व्यायाम और आत्मिक व्यायाम भी करना चाहिए। यह पांचवा तत्व हुआ सम्यक् व्यायाम। छठा तत्व है सम्यक् कर्मान्त। जब तुम कोई कार्य शुरू करते हो, तब तुम्हें बहुत कुशलतापूर्वक और सुन्दर तरीके से उसका समापन भी करना चाहिए। किसी भी कार्य को अपूर्ण अवस्था में मत छोड़ो। कार्य का समापन हमेशा सुन्दर होना चाहिए। भगवान बुद्ध ने कहा, सम्यक् कर्मान्त अर्थात् जब तुमने कार्य आरम्भ किया है तो सुन्दर तरीके से इसका समापन भी करना होगा।

सप्तम उपदेश है सम्यक् स्मृति। स्मृति क्या है? जब भी अपनी इन्द्रियों द्वारा तुम कुछ देखते हो, कुछ सुनते हो अथवा कुछ गन्ध लेते हो, तब क्या होता है? तुम्हारा मन कुछ स्तरों में विभाजित हो जाता है। तब सम्यक् स्मृति क्या है? इष्ट मन्त्र का जप हमेशा दुहराते रहना चाहिए। तुम्हें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि परमात्मा का स्मरण करना, अपने इष्ट मन्त्र का जप करना तुम्हारा सबसे बड़ा कर्त्तव्य है। यही सम्यक् स्मृति है।
अन्तिम तत्व है सम्यक् समाधि। जब तुम किसी संगीत की उत्कृष्ट, मनोरम स्वर-लहरी को सुनते हो, तब वह संगीत तुम्हारे मन का विषय बन जाता है और सुनते समय तुम्हारा विषयी मन उस संगीत में खो जाता है। यह श्रवण में मन की निरुद्धावस्था हुई। इसी तरह जब तुम परमसत्ता, परमपुरुष का ध्यान करते हो, तब तुम्हारा मन उन में खो जाता है। यह सम्यक् समाधि हुई। परमपुरुष के भाव में मन का निलम्बन हो गया।

यह अष्टांगिक मार्ग एक आध्यात्मिक साधक के जीवन का आवश्यक अंग है। तुम लोगों को यह हमेशा स्मरण रखना चाहिए कि उस परम आनन्द की प्राप्ति में सफलता पाने के लिए अष्टांग विधि का पालन अनुकरणीय है। तुम्हें अपने मन में सदैव इस बात को याद रखना चाहिए।
(6 मई को आनंदमूर्ति जी की 91वीं जयंती (आनंद पूर्णिमा) के अवसर पर)
Originally published in livehindustan.com. Here is the link:

http://www.livehindustan.com/news/tayaarinews/tayaarinews/article1-story-67-67-230603.html

Posted in Ananda Marga News | Leave a comment

Photos by margi sister Nkonyezi Nanyamka published in The Dallas Morning News

Namaskar Dada,

Please pick up a copy of the Dallas Morning News today (Friday
4/20/12), if you would like to see the article on Nkonyezi. It is in
guide live (p. 66). Also, there is a slide show presentation of her
photography on their website ( related events/subjects). The president
of North lake will be scheduling an exhibition of her photography to
honor her legacy. It is open for the public and students to attend.
It will present before the semester ends. She will also be receiving
her associates degree on May 12. I will be standing in for her at
10am. With a sincere heart, I invite all to attend both events.
When I receive the exihibition date, I will post. Please forward this
email to the Margis.

From my heart,
Nathifa

Posted in Memorial | Leave a comment

RERITO DE PRIMAVERA, 5 A 8 de Abril 2012

RERITO DE PRIMAVERA,

    5 A 8 de Abril 2012

 

 

 Namaskar

 

Estamos muy contentos de informarles que Dada Shantatmananda y Dada Ragatmananda ylos Margiis de Cuernavaca han decidido celebrar el Retiro de primavera de Ananda Marga  en Cuernavaca  en Semana Santa, del 5 al 8 de abril de 2012. Es una gran oportunidad para hacer uso de estas vacaciones para una transformación física, mental y espiritual. Al participar de las  interesantes clases sobre Filosofia espiritual,  socio económica,  Prabhata samgiita y otros programas de devoción. Se enviará el folleto del Retiro para conocer más detalles y puedan regístrarse por adelantado para su conveniencia. Para más información, comuniquese al Centro de Ananda Marga Cuernavaca: Tel: 3100604. Correo:anandamargacuernavaca@hotmail.com

 

 

 

ASPECTOS CIENTIFICOS DE LA MEDITACION

Hasta hace poco la meditación se consideraba un tema tabú para la investigación científica. La mayoría de los científicos consideraban que era el ritual sin significado de “místicos” locos, o simplemente un tipo de “auto-hipnosis” practicada por gente que no tenía nada mejor que hacer. Muchas personas la comparaban con el hibernar de los osos y otros animales – meramente la suspensión de los procesos vitales, con un tonto desperdicio de preciosos momentos de vida. “ De todos modos , ¿ que obtiene usted de la meditación ? – Era la pregunta común , y la gente la desechaba riéndose.Hoy en dia docenas de libros de Yoga atestan los estantes en las tiendas, centros comerciales, librerías y puestos de periódicos: “ Yoga y Salud “… “ Yoga para el Ejecutivo “….. “ La Clave para la Conciencia Interna ”…..Han estado apareciendo en muchas revistas artículos sobre la meditación, como en revistas de Modas y Espectaculos. En un número reciente,una modelo famosa, retratada en postura de loto, atribuia su serenidad y belleza a sus meditaciones diarias y ejercicios de Yoga. Incluso las estrellas de Hollywood de todas las edades están practicando Yoga. En su momento Jacqueline Kennedy  -  Onassis, también fue fotografiada en su isla griega haciendo asanas y meditación. Los estudiantes univesitarios, a través de todo el mundo están practicando la meditación, experimentando con diferentes técnicas de diferentes libros y esperando ansiosamente la  aparición de su propio Gurú en su vida.

Meditación Psicoterápica Estudios Psicológicos
Ahora mucha gente comenta los beneficios de la meditacion
 Orientación: 
 “ Calma Interior”….” Mejor sueño”…..” Mayor capacidad para enfrentarse a situaciones  tensas”…” Sentidos avivados y agudizados ”…” Mejor funcionamiento del cuerpo”…” Mayor capacidad para concentrarse y aprender”…” Conciencia y sensibilidad acrecentadas”……..Los Psicologos, especialmente los Psiquiatras, escuchan con mas cuidado estas voces entusiastas, y muchos están utilizando la meditación como terapia para sus pacientes mentalmente perturbados, pero estos Psiquiatras no son Gurús, y ellos mismos reconocen que su mayor dificultad es enseñar a sus pacientes a meditar, y luego, interpretar las experiencias de la meditación. Ellos solo intentan abrir la mente subconciente de sus pacientes, donde creen que están escondidos los “poderes creadores” y el “potencial curativo”. Concentrandose en varias imágenes   arquetípicas” como una pradera, una montaña, un templo o capilla, un mandala, los pacientes, ( dicen los Psiquiatras) regresan al fresco estado mental de la niñez, supuestamente la “ base creadora de la vida ”. Alli vuelven a ganar energía para resolver sus problemas emocionales. Hasta ahora la Psicoterapia por medio de la meditación se ha limitado a crear estas fantasias simbólicas y ha explorar las profundidades emocionales de la mente, pero estos Psicoterapeutas están muy concientes de que ellos solo son principiantes sin experiencia y de que “la meditación se convertirá en una de las principales técnicas terapéuticas”.

 

 

Posted in Ananda Marga Events | Leave a comment

Ananda Marga May DMS 2012 on May 25, 26 and 27

आनंदमार्ग प्रचारक संघ का नारी सशक्तीकरण पर जोर

Updated on: Fri, 30 Mar 2012 08:41 PM (IST)

आनंदमार्ग प्रचारक संघ का नारी सशक्तीकरण पर जोर

 

जमालपुर (मुंगेर), निज संवाददाता : आनंदमार्ग प्रचारक संघ के केन्द्रीय समिति की शुक्रवार को वलीपुर आश्रम में हुई बैठक में प्रचार प्रसार सहित आठ सूत्री बिन्दुओं पर चर्चा की गई। आगामी 25 मई से पुरुलिया में धर्म महासम्मेलन का निर्णय लिया गया।

बैठक की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पुरोध आचार्य विश्ववेदानंद अवधूत ने यह जानकारी दी। विभिन्न देशों में प्रचार प्रसार के साथ नारी सशक्तीकरण , पूनर्जागरण, उत्थान सहित मानव-कल्याण पर चर्चा हुई। विश्व के आर्थिक संकट व अन्य बिंदुओं पर वरिष्ठ पुरोधा सह कार्यवाह महासचिव आचार्य चित्तस्वरूपानंद एवं केन्द्रीय पुरोधा रूद्रानंद व निर्मोहानंद अवधूत ने विचार किया। अंत में पुरुलिया में 25, 26, 27 मई को महा धर्मसम्मेलन की रूपरेखा बनाई। मौके पर आचार्य दयाशिखरानंद, आचार्य सुदेवानंद, आचार्य संपूर्णानंद, अचिंतानंद, राकेशानंद अवधूत सहित दर्जन भर महिला प्रतिनिधि थीं।

http://www.jagran.com/bihar/munger-9077879.html

Posted in Ananda Marga News | Leave a comment

आगामी धर्म महासम्मेलन को देश-विदेश के प्रतिनिधियों से विचार

आगामी धर्म महासम्मेलन को देश-विदेश के प्रतिनिधियों से विचार

Updated on: Tue, 27 Mar 2012 09:53 PM (IST)

आगामी धर्म महासम्मेलन को देश-विदेश के प्रतिनिधियों से विचार

 

जमालपुर (मुंगेर), निज संवाददाता : आनंदमार्गियों का दो दिवसीय धर्म महासम्मेलन समाप्त होने के बाद मंगलवार को आश्रम परिसर वलीपुर में देश-विदेश के सभी प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय बैठक शुरू हुई। आनंदमार्ग प्रचारक संघ के वरिष्ठ पुरोधा आचार्य विश्ववेदानंद अवधूत ने बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक में आगामी धर्म महासम्मेलन को सफल बनाने में विभिन्न देशों के अवधूतों की भूमिका एवं विकास पर गहन चिंतन किया गया। वर्तमान में मार्गियों के दायित्व, सामाजिक व आर्थिक समस्याओं के निदान में उनकी भूमिका पर विचार हुआ। अंत में विश्ववेदानंद जी ने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक आनंदमार्ग की लौ जलाने का सतत प्रयास करना है। बैठक का संचालन मार्ग के कार्यवाहक महासचिव आचार्य चितस्वरूपानंद अवधूत ने किया। जहां दिल्ली के प्रतिनिधि अवधूत अमलेशानंद, हांगकांग से आचार्य शुभनिगमाशानंद, जापान से युक्तेशानंद, रूस से भावत्रानंद, आस्ट्रेलिया से आचार्य अनन्यानन्द, अमेरिका से आचार्य हरिपरायण, न्यूयार्क से आचार्य रूद्र प्रकाशानन्द सहित देव शिखरानन्द आदि थे।

Posted in Ananda Marga News | Leave a comment

मानव का जीवन एक आदर्शमुखी प्रवाह : विश्वदेवानंद

मानव का जीवन एक आदर्शमुखी प्रवाह : विश्वदेवानंद

जमालपुर (मुंगेर),निज संवाददाता : दो दिवसीय आनंदमार्ग धर्म महासम्मेलन का समापन रविवार देर रात जेएसए ग्राउंड में बाबा की जयकार के साथ हो गया। आज के प्रवचन में आचार्य विश्वदेवानंद ने वहां मौजूद हजारों भक्तों से कहा कि सेवा, सत्कर्म व साधना से परम पिता की प्राप्ति हो सकती है। समापन महासम्मेलन का आकर्षण क्रांति विवाह रहा। वरिष्ठ पुरोधा विश्ववेदानंद अवधूत ने कहा कि मानव का जीवन एक आदर्शमुखी प्रवाह है। यदि हम एक आदर्श समाज की स्थापना करना चाहते हैं तो संपूर्ण विश्व को आदर्श विवाह प्रथा के माध्यम से समाज के आधार को रखना होगा।

उन्होंने अलौकिक विद्या व योग-साधना का अभ्यास कर दिव्य शक्ति प्राप्ति की दिशा में बढ़ने कहा। कार्यक्रम के बीच-बीच में बाबा के तैयार किये प्रभात संगीत का मार्गियों ने आनंद लिया। बाबा नाम केवलम् जयघोष के साथ सभी ने बाबा के निर्देश पर चलते हुए संस्था को सुदृढ़ करने की शपथ ली। अवधूत ने बाबा के अनुयायियों की संख्या बढ़ाने के लिए अपने-अपने देश व शहर में प्रयास करते रहने के लिए कहा। इस मौके पर आचार्य दयाशिखरानंद अवधूत, आचार्य रूद्रानंद अवधूत, आचार्य अचिंतानंद अवधूत, आचार्य संपूर्णानन्द अवधूत, आचार्य केशवानन्द अवधूत, आचार्य अभिरागानन्द अवधूत, आचार्य अमेलेशानन्द अवधूत, आचार्य सरणानन्द अवधूत, आचार्य कृपामयानन्द अवधूत, आचार्य शुभ निरायाशानन्द अवधूत, आचार्य गतिभयानन्द अवधूत, आचार्य महितोषानन्द अवधूत, आचार्य नाभातितानन्द अवधूत, आचार्य निर्मोहानन्द अवधूत, आचार्य निर्मेघानन्द अवधूत, आचार्य निर्मोहानन्द अवधूत, आचार्य सिद्धयोगानन्द अवधूत सहित हजारों मौजूद थे।

Posted in Ananda Marga News | Leave a comment

विदेशियों को आया देख बढ़ाये फलों के दाम

विदेशियों को आया देख बढ़ाये फलों के दाम

Updated on: Sun, 25 Mar 2012 07:38 PM (IST)

विदेशियों को आया देख बढ़ाये फलों के दाम

 

जमालपुर (मुंगेर), निज संवादाता : आनंद मार्ग के दो दिवसीय धर्म महासम्मेलन में देश के अन्य राज्यों के साथ विदेशी भक्तों की बड़ी तादाद देख बाजार के विक्रेताओं ने फलों के दाम सामान्य दिनों से अधिक बढ़ा दिये।

सम्मेलन की तैयारी के लिए लगभग एक सप्ताह पूर्व से बाबा के आश्रम और बाजारों में काफी चहल-पहल रही। सम्मेलन स्थल पर खाने-पीने की चीजों के साथ ही बाबा के संदेश, दर्शन तथा प्रभात संगीत पर आधारित पुस्तकों के स्टॉल भी लगे थे। अनुयायियों ने किताबें खरीदी। सुबह अवधूतों ने कई नये लोगों को दीक्षा दी। साथ ही बाबा के दर्शन के अनुरूप जीवन को संवारने की जानकारी भी। खाली समय में जरूरत की चीजें खरीदने के लिए बाहर से आये मार्गियों से फल विक्रेताओं ने अधिक कीमत वसूली। स्टॉल में लगी लिट्टी की दुकान व अस्थायी भोजनालयों में अच्छी खासी भीड़ देखी गयी तो लौहनगरी में रिक्शाचालकों की भी चांदी रही। इस महाधर्मसम्मेलन में एक सप्ताह पूर्व से ही रिक्शाचालकों की चांदी रही।

Posted in Ananda Marga News | Leave a comment

क्रांतिकारी विवाह की गवाह बने देश-विदेश के आचार्य

क्रांतिकारी विवाह की गवाह बने देश-विदेश के आचार्य

Updated on: Sun, 25 Mar 2012 07:49 PM (IST)

क्रांतिकारी विवाह की गवाह बने देश-विदेश के आचार्य

जमालपुर (मुंगेर), निज संवाददाता : आनंदमार्ग नए सुखी, समुन्नत समाज-निर्माण के साथ आदर्श अंतरजातीय विवाह करा मानव मात्र को पारिवारिक सूत्र में बांधने के लिए सजग है। रविवार को चेन्नई व कटिहार के वर-वधू के क्रांतिकारी विवाह के गवाह देश-विदेश के हजारों आनंदमार्गी बने।

मानव को खंडित करने वाले ही जात-पात के नाम पर अपराधों को बढ़ावा दे रहे हैं। धर्म महासम्मेलन में क्रांतिकारी चेन्नई के एन भूपाल के इंजीनियर पुत्र भुपालान एवं कटिहार के गुरुदेव प्रसाद की पुत्रीमधु आनंद के साथ आनंदमार्गी क्रांतिकारी विवाह कराया गया। इस विवाह के गवाह देश-विदेश के 20 हजार आचार्य व अनुयाई बने।

जानकारी के मुताबिक शादी मार्गी परिवार में होनी चाहिए। ऐसी शादी सर्वप्रथम 1955 में जमालपुर में हुई थी। आज 57 साल बाद 200 देश में 1.15 लाख जोड़े अंतरजातीय विवाह किए जा चुके हैं। नए वर-वधू को सभी ने आशीर्वाद दिया। क्रांतिकारी विवाह की विशेषता दयाशिखरानंद अवधूत ने बताया कि मार्ग के प्रवर्तक विश्वमानव को एकमात्र जाति का मानते हैं, इसलिए जात-पात से उपर उठ कर ऐसे विवाह को बढ़ावा दिया।

http://www.jagran.com/bihar/munger-9056160.html

Posted in Ananda Marga News | Leave a comment

मनुष्य को अध्यात्मिक साधना की नितांत आवश्यकता : विश्वदेवानंद

मनुष्य को अध्यात्मिक साधना की नितांत आवश्यकता : विश्वदेवानंद

Updated on: Sun, 25 Mar 2012 08:29 PM (IST)

मनुष्य को अध्यात्मिक साधना की नितांत आवश्यकता : विश्वदेवानंद

जमालपुर (मुंगेर), निज संवाददाता : दो दिवसीय आनंदमार्ग धर्म महासम्मेलन के दूसरे दिन रविवार देर रात जेएसए ग्राउंड में बाबा जयकारा के साथ प्रवचन कार्यक्रम में आचार्य विश्वदेवानंद ने कहा कि मनुष्य को अध्यात्मिक साधना की नितांत आवश्यकता है। सेवा, सत्कर्म व साधना से परम पिता की प्राप्ति हो सकती है। प्रात:काल बाबा के मंडप की परिक्रमा के साथ भजन व कीर्तन किया गया।

बाबा के दिये संदेशों में जन कल्याण के प्रति समर्पण का संकल्प दोहराते हुए अवधूत ने मार्गियों से साधना-पद्धति को निष्ठापूर्वक करने पर जोर दिया। उन्होंने अलौकिक विद्या और योग-साधना का अभ्यास कर दिव्यशक्ति प्राप्ति की दिशा में बढ़ने कहा। कार्यक्रम के बीच-बीच में बाबा के तैयार किये प्रभात संगीत का मार्गियों ने आनंद लिया। बाबा नाम केवलम् जयघोष के साथ सभी ने बाबा के निर्देश पर चलते हुए संस्था को सुदृढ़ करने की शपथ ली। अवधूत ने बाबा के अनुयायियों की संख्या बढ़ाने के लिए अपने-अपने देश व शहर में प्रयास करते रहने के लिए कहा। इधर दो दिनों तक चलने 40 घंटे के परिक्रमा में हजारों की संख्या में आनंदमार्गी धर्मप्रेमी एवं अवधूतों ने हिस्सा लेकर बाबा नाम केवलम् का मंत्रोच्चार किया। आचार्य रूद्रानंद अवधूत, आचार्य अचिंतानंद अवधूत, आचार्य संपूर्णानन्द अवधूत, आचार्य केशवानन्द अवधूत, आचार्य अभिरागानन्द अवधूत, आचार्य अमेलेशानन्द अवधूत, आचार्य सरणानन्द अवधूत, आचार्य कृपामयानन्द अवधूत, आचार्य शुभ निरायाशानन्द अवधूत, आचार्य गतिभयानन्द अवधूत, आचार्य महितोषानन्द अवधूत, आचार्य नाभातितानन्द अवधूत, आचार्य निर्मोहानन्द अवधूत, आचार्य निर्मेघानन्द अवधूत, आचार्य निर्मोहानन्द अवधूत, आचार्य सिद्धयोगानन्द अवधूत सहित हजारों मौजूद थे।

http://www.jagran.com/bihar/munger-9056440.html

Posted in Ananda Marga News | Leave a comment